"घूँघट की छाँव" एक ग्रामीण भावनात्मक उपन्यास है, जो समाज, शिक्षा, महिला संघर्ष और अनकही भावनाओं की कहानी प्रस्तुत करता है।
भैरूपुरा गाँव में एक छोटी-सी सीखने की कोशिश धीरे-धीरे सामाजिक दबाव, रिश्तों और खामोश संघर्ष की कहानी बन जाती है।
कविता की चुप्पी, अर्जुन की बेबसी और समाज की कठोर सोच के बीच यह कहानी उन आवाज़ों को शब्द देती है, जो अक्सर सुनाई नहीं देतीं।
एक भावनात्मक, यथार्थवादी और संवेदनशील कहानी?
जहाँ हर लड़ाई दिखाई नहीं देती... लेकिन हर दर्द महसूस होता है।